Sunday, 3 January 2016

कम्युनिटी इमर्शन अपने फेलो का............................

कल ही अपने फेलोज, कम्युनिटी इमर्शन के लिए गए है. काफी अलग-अलग सोच उनकी निकलकर आई थी. किसी को घर मिला था तो किसी को नही. कोई जान रहा था की कम्युनिटी में जाकर क्या करेंगे तो किसीको को पता ही नही था की क्या करना है? वे इस अनुभव को तो जीना चाहते है. वे जीना चाहते है उन अनुभवो को जो अब तक उन्होंने नही जिया था. अपने खुद के family की भी थोडी बहुत चिंता थी की घरवालों को बताया जाया जाए या नही? इन तमाम सवालो को वे झेल रहे थे. 

लेकिन इतना तो जान रही थी कि वो इस प्रक्रिया से सीखना चाहते है, आगे बढ़ना चाहते है. आज उनका दुसरा दिन है कम्युनिटी में. मै नही जानती की वो लोग अब इस वक़्त क्या कर रहे होगे? क्या उनको वहा का खाना, बिस्तर, लोग, वहा की एक अलग ही सुगंध/दुर्गंध पसंद आयी होगी या नही? इतना तो जानती हु वो बड़े ही ख़ुशी से इस नये प्रोसेस के लिए चले गए है. उन्हें जाने से पहले जब उनको में टिका लगा रही थी और कुछ बेस्ट वीशेस साझा किया तो अच्छा लग रहा था उन्हे और मुझे भी. मानो कि वे किसी बडे लक्ष्य के प्राप्ती के लिये जा रहे हो. 

वे जानते है की वहा पर उनके साथ क्या हो सकता है तो कुछ लोग नही जानते थे की क्या होगा? वे बस उस अहसास में रहना चाहते थे. लेकिन मै जानती हु यह अनुभव उनके जीवन का बड़ा ही अहम हिस्सा होगा. अपनी एक फेलो कह रही थी की, "जब वो दस साल के बाद इस मुंबई में आएगी तो उसके लिए दुसरे घर के दरवाजे हमेशा के लिए खुले रहेंगे". इस बात से वो काफी खुश है. दूसरा फेलो बता रहा था की, "मुझे एक तमिल परिवार ने मना कर दिया है. उन लोगो के पास जगह तो है लेकिन कोई मुझे रखने के लिए नही मना कर रहा है. देखते है आज जाकर की मुझे घर कहा पर मिलेगा". अपना दूसरा फेलो बता रहा है की, "घर तो मुझे कुछ दिनों के बाद मिलने वाला तब तक स्कूल में रह लूंगा, और खाना एक ताई के पास मिल जाएगा". एक फेलो बता रहा था की, उसे तो पुरे तीन घर मिले है, इस प्रोसेस के लिए जाने से पहले ही उसे घर से खाना दोपहर का मिलने लगा है". यह सुनकर काफी अच्छा लगा कि, वो जाने के लिये तो तैयार तो थे हि लेकीन उसके साथ-साथ वे उन तमाम विचारो, जज्बातो को साथ ले जा रहे थे जो उन्हे community मी रहने के लिये मद्द करेगा. 

दुसरी तरफ जाने से पहले वे उन्हे घर और खाने कि चिंता उनके बातो से आ रही थी. लेकीन इस प्रक्रिया कि वजह से उनके लिये कितनी महत्त्वपूर्ण बात है. इतनी गंभीरता उनके बातो से निकलकर आ रही होगी. कहते है कि घर, कपडा, मकान यह काफी मुलभूत बात है एक इन्सान के जीवन में जो इनसे पता चल रहा था. 

एक फेलो तो बता रही थी की, उसका दोस्त उसे मना कर रहा था इस प्रोसेस में हिस्सा लेने के लिए. कुछ तो घरवालों को बताने के लिए हिचकिचा रहे है. कुछ फेलो ने सोच ही लिया की कोई भी पैसे या कम से कम पैसे ले जानेवाला है तो कोई कह रहा था, की फोन-इन्टरनेट को इस्तेमाल नही करेगा. इन बातो को सुनकर वे काफी गंभीर लगे इस प्रक्रिया को जानने और समझने के लिये. 

कम्युनिटी इमर्शन यह एक ऐसी प्रोसेस थी अपने फेलो के लिये जहा पार उन्हे बहुत कुछ अनुभव करना था, वे जानना चाह रहे थे जीवन के तमाम अनुभव लोगो के मुह्बोली बातो से, वहा पर वे बहुत सारे आयडीयाज को करके देखना चाह रहे थे. उनके जीवन को वे फिर एक बार समझना चाह रहे थे.