Tuesday, 24 December 2013

जिदंगी मेरी बच्चो के साथ भाग १....................................

अच्छा लगता है की जिदंगी में बहुत कुछ सिखने समझने मिल रहा है. लगता है की ऐसे ही जिंदगी बीते. अब भी में बच्चो के साथ काम कर रही हु. वैसे तो मुझे काफी अच्छा लगता है उनके साथ काम करना. बच्चो में एक बात अच्छी लगती है की वो कोई भी चीज तुरंत अपना लेते है. इसलिए अगर उनके सामने कोई नइ या पुरानी चीजे लाओ वो बड़े स्वागत के साथ उसे अपना लेते है. 

आज ही होम में बच्चो के लिए एक कार्यक्रुम आयोजित किया था, तो उसमे एक लड़का अपने गिटार के साथ गाने गा रहा था, बच्चे उत्साहित थे.

आज पूजा ने मुझे अपने पास बुलाया और बोल रही थी की तुम कितनी बड़ी हो गई हो? कभी कभी मेंटली retarded बच्चो के भीतर जाना डर से लगने लगता है लेकिन हिम्मत से जाती हु की कुछ नहीं होगा. दूसरी संजना जो मुझे हमेशा अपनी मुस्कराहट और हाथ जोड़कर मेरा स्वागत करती है. उसके मुस्कुराहट से ही मुझे उसके पास जाने का मन कर होता है. काफी प्यारी बच्ची है. एक है बिल्ला जो मुझे देखकर जोर से हसती है और मुझे अपने पास बुलाकर मेरे हाथो को कसकर पकड़कर हैंडशेक करती है, उसे काफी अच्छा लगता है मुझे मिलकर. 

तीसरा है अतीफ़ आज मुझे देखते हुए आज शर्मा रहा था मैंने उसे पूछा भी की, "क्या मुझे देखकर शर्म आती है, तो वो और शर्मा रहा था" 

कल और एक लड़की पूजा से मुलाकत हुई तो उसके एक ऊँगली का  नाख़ून दरवाजे में आने के वजह से काफी बुरी तरीके से टूट गया था. उस वक्त क्या दर्द हुया होगा तो वही जाने लेकिन उस दर्द को समझ सकते है. 
यहाँ पर बच्चो के साथ वक्त बिताते हुए उनसे बहुत कुछ सिख सकते है और उन्हें बहुत कुछ दे सकते है हमारे संवाद के माध्यम से.